बदनावर खबर/- श्रीमद् भागवत कथाः गोवर्धन पर्वत का पूजन कर जायसवाल परिवार ने लगाया भगवान को 56 भोग

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रिपोर्टर दिपक डोडिया

भागवत कथा में आज पांचवें दिन की कथा में भागवताचार्य डाक्टर संजय शास्त्री ने गोर्वधन पूजन की कथा सुनाई। इस अवसर पर बृजवासी बने श्रद्धालुओं ने गोवर्धन पर्वत का पूजन कर विष्णुलाल जायसवाल परिवार ने 56 भोग लगाए। श्री कृष्णा कामधेनु गौ शाला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दौरान भागवतचार्य वालों ने श्रीकृष्ण भगवान के 56 भोग गोवर्धन पूजा के महत्व को बताया। इस दौरान भगवान गोवर्धन का पूजन भी किया गया भागवताचार्य ने बताया कि भगवान इंद्र जब प्रकोप में थे। तब उन्होंने वर्षा करके कहर बरसाया चारों ओर हाहाकार मच गई गांव जलमग्न होने लगे तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उंगली पर उठा लिया। इससे गांव के सभी लोग गोवर्धन पर्वत के नीचे आ गए और वहां शरण ली। पं. शास्त्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का मान नष्ट करके गिर्राज पूजा कराई थी। सभी ब्रजवासियों ने गोवर्धन पहुंचकर गोवर्धन पर्वत का पूजन किया और छप्पन भोग लगाया। उन्होंने कहा है कि आज भी वृंदावन में बांके बिहारी भगवान को दिन में 8 बार भोग लगाया जाता है पूरे सात दिन भगवान श्री कृष्ण ने भूखे प्यासे रहकर गोवर्धन पर्वत को उठा रखा था। इस मौके पर झांकी आकर्षण का केन्द्र रही। पंडित शास्त्री ने कहा है कि इस भोग से मन के विकार दूर होते हैं, मन की शुद्धि होती है, भगवान अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए किसी ना किसी रूप में प्रकट होते हैं। श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए राक्षसों का अंत किया तथा सामाजिक कुरीतियों को मिटाने एवं निष्काम कर्म से जीवन सफल बनाने का उद्देश्य दिया। इस मौके पर गौ शाला परिसर में गिरिराज पर्वत की झांकी सजाई गई एवं अन्नकूट एवं छप्पन भोग लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया उपर्युक्त जानकारी पत्रकार अनुप जायसवाल ने दी।

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