अलीराजपुर से पीयूष राठौड़
विगत कई वर्षों से चली आ रही गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक के पावन उत्सव को मनाने की परंपरा का निर्वहन करते हुए ग्राम के अनेक पंडालो में उक्त उत्सव बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है उसी कड़ी में नवोदित गणेश उत्सव समिति द्वारा भी प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी उत्सव अंतर्गत विशालकाय गणेश प्रतिमा एवं अद्भुत पंडाल सजा के साथ गणपति बप्पा विराजित कर नित्य धार्मिकता एवं राष्ट्रीयता से ओत प्रोत जीवंत झांकियां प्रदर्शित की जा रही हैं जिन्हें निहारने सैकड़ो की संख्या में भक्तों का तांता लगा रहता है
उक्त जीवंत झांकियां को निहारने स्थानीय निवासी ही नहीं अपितु आसपास के ग्रामीण अंचलों से भारी संख्या में क्या बच्चे क्या युवा क्या बुजुर्ग हर कोई पधार कर आकर्षक सज्जा एवं अद्भुत झांकिया को निहार कर धर्म लाभ ले रहे हैं
नित्य अलग-अलग जजमानों द्वारा आरती एवं महाप्रशादी का भाव समर्पण कर अपने को धन्य महसूस कर रहे हैं
उक्त उत्सव झांकी प्रदर्शन ,आरती व महाप्रसादी वितरण तक ही सीमित नहीं है बल्कि बच्चों के अंदर छिपी हुई प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने हेतु विभिन्न प्रकार की खेल कूद शारीरिक, मानसिक , बौद्धिक गतिविधियां आयोजित की जा रही है जिसमें सभी बच्चे और बड़े के साथ महिलाएं भी बढ़-चढ़कर भाग ले रही है और अपने बचपन के दीनों को याद कर आनंदित हो रही है
अनंत चतुर्दशी के एक दिन पूर्व की महाआरती और महाप्रसादी का भाव समर्पण समस्त मातृशक्ति महिला वर्ग के द्वारा रखा गया है जो दर्शाता है कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में अग्रणी होती जा रही है
उक्त दस दिवसीय गणेश उत्सव ग्राम में विराजीत समस्त पंडालो में इसी तरह बड़ी धूमधाम से गणपति बप्पा मोरिया मंगल मूर्ति मोरया के जयकार लगाते हुए आरती और महाप्रसादी वितरण कर मनाया जा रहा है


